डॉ ध्रुवी और सम्युग translated
कॉपी पढ़ने लगते है ।
उसमें लिखी बातें कुछ इस
प्रकार है ।
बात उस समय की जब भारत पर
महाराज एलिसाइ का राज था । ( उस समय श्री लंका भारत से जुडा हुआ था , यहा श्री लंका और भारत के बिच नीरधारा नाम की एक नदी का प्रवाह था । कालांतर
मे यह नदी फैल कर वर्तमान समुद्र मे परिवर्तित हो गयी । ) महाराज को यह मशीन उनके पिता
से प्राप्त हुइ थीं । उनके पिता को यह मशीन दैवी ईशा ने दी थीं ।
ईशा – महाराज यह मशीन मे
आपको दे रही हूँ । इसे बहुत ज्यादा सम्भाल के रखना । भविष्य मे धरती के लोगो पर एक
बहुत बडी़ आपदा आने वाली है । इस मशीन मे वो सारी जानकारी उपलब्ध है । मैं सारी बातें
आपको बता सकती हूँ , परंतु इस समय वो सारी बाते आप समझ
नहीं पायेंगे । अतः आपसे निवेदन है कि इसे अपने प्राणों से भी ज्यादा सम्भाल कर रखे
।
इतना बताकर वो किसी यान
में बैठकर वहा से चली जाती है । वे हमेशा उसी यान मे बैठकर धरती पर आते थे । देखते
ही देखते वह यान एक तेज प्रकाश के साथ वहा से गायब है । महाराज इस मशीन को अपने खजाने
के साथ रख देते है । इस पुस्तक को भी उसी मशीन के साथ रख देते है , ताकि भविष्य मे जो लोग इसे प्राप्त करेंगे उन्हे इसकी जानकारी दी जा सके ।
इस पुस्तक के दुसरे भाग
मे उस मशीन की कार्यप्रणालि का विवरण दिया हुआ है ।
इसकी विस्तृत जानकारी पढ़ने के
बाद ।
ध्रुवी - यह बिल्कुल किसी मेमोरी की तरह है । इसकी तकनीक आज
के मेमोरी
कार्ड जैसी ही है ।
सम्युग - मनुष्य आज तकनिकी
रुप से इतना सक्षम है कि इस तरह की किसी
मशीन मे जो सुचना उपलब्ध है उसे पढ़ा जा सके
।
ध्रुवी - परंतु समस्या यह है कि यह मशीन 8 bit सिस्टम पर आधारित है । पर आज हमने करीब 800 bit सिस्टम
पर आधारित कंप्यूटर बना लिये है । इस तरह के 8 bit कंप्यूटर करीब
सन् 1990 के दशक मे उपयोग किये जाते थे ।
सम्युग – इस तरह का पुराना
कम्प्युटर हमे कहा मिलेगा ?
ध्रुवी – मिल सकता है , जापान ने 2030 मे टॉकियो मे एक कम्प्युटर म्युजियम बनाया था । हम कल ही हम
इस मशीन को लेकर टॉकियो चले जायेंगे ।
नई दिल्ली से टॉकियो के
लिये प्लेन मे दोनो बैठ जाते है ।
दिनांक 25 जनवरी 2051 , टॉकियो , जापान
।
वे दोनो अगले दिन सुबह अपने
गाइड के साथ उस म्युजियम मे जाते है । और
वहा के मेनेजर जियांग से मिलते है ।
ध्रुवी – सर मेरा नाम ध्रुवी
पुरातत्व विभाग भारत सरकार , और ये है सम्युग पुरातत्व विभाग
श्री लंका से । दरअसल हमे 1990 के दशक के 8 bit कंप्यूटर की आवश्यकता
है । हमे रिसर्च करते समय एक 8 bit सिस्टम पर आधारित एक डेटा
स्टोरेज मशीन मिली है और हमें उसका डेटा प्राप्त करना है । तो अगर आप हमे वह कंप्यूटर
उपयोग करने देंगे तो आपकी बडी़ मेहरबानी होगी ।
गाइड मेनेजर जियांग को सबकुछ
समझाता है ।
जियांग - हमारे लिये बड़े सौभाग्य की बात होगी की हमारा यह
संग्राहालय
आपके काम आ सके । आप इसका उपयोग कर सकते है ।
जियांग उन्हे उस कंप्यूटर
के पास ले जाकर छोड़ देते है ।
जियांग – अब आप अपना काम
कर सकते है । Best of Luck ।
ध्रुवी – Thank
you sir .
ध्रुवी और सम्युग उस मशीन
को कंप्यूटर से कनेक्ट करते है । उस समय के कंप्यूटर मे wireless
डेटा ट्रांस्फर करने के लिये केवल Bluetooth ही
एक मात्र माध्यम था । ये कम्प्युटर केबल से बाहरी डिवाइस को कनेक्ट करने मे सक्षम नहीं
थे । अतः वे Bluetooth के माध्यम से डेटा ट्रांस्फर स्टार्ट कर देते है ।
आगे क्या होने वाला है ये
जानेंगे अगले एपिसोड मे ।
अगर आप यह कहानी वीडियो में जानना चाहते है तो comment करे |
Very excited bro...
ReplyDelete#BigFan
Wow
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