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Monday, 30 March 2020

Episode 2 (Hindi)




डॉ ध्रुवी और सम्युग translated कॉपी पढ़ने लगते है ।


उसमें लिखी बातें कुछ इस प्रकार है ।


बात उस समय की जब भारत पर महाराज एलिसाइ का राज था । ( उस समय श्री लंका भारत से जुडा हुआ था , यहा श्री लंका और भारत के बिच नीरधारा नाम की एक नदी का प्रवाह था । कालांतर मे यह नदी फैल कर वर्तमान समुद्र मे परिवर्तित हो गयी । ) महाराज को यह मशीन उनके पिता से प्राप्त हुइ थीं । उनके पिता को यह मशीन दैवी ईशा ने दी थीं ।


ईशा – महाराज यह मशीन मे आपको दे रही हूँ । इसे बहुत ज्यादा सम्भाल के रखना । भविष्य मे धरती के लोगो पर एक बहुत बडी़ आपदा आने वाली है । इस मशीन मे वो सारी जानकारी उपलब्ध है । मैं सारी बातें आपको बता सकती हूँ , परंतु इस समय वो सारी बाते आप समझ नहीं पायेंगे । अतः आपसे निवेदन है कि इसे अपने प्राणों से भी ज्यादा सम्भाल कर रखे ।


इतना बताकर वो किसी यान में बैठकर वहा से चली जाती है । वे हमेशा उसी यान मे बैठकर धरती पर आते थे । देखते ही देखते वह यान एक तेज प्रकाश के साथ वहा से गायब है । महाराज इस मशीन को अपने खजाने के साथ रख देते है । इस पुस्तक को भी उसी मशीन के साथ रख देते है , ताकि भविष्य मे जो लोग इसे प्राप्त करेंगे उन्हे इसकी जानकारी दी जा सके ।


इस पुस्तक के दुसरे भाग मे उस मशीन की कार्यप्रणालि का विवरण दिया हुआ है । 

इसकी विस्तृत जानकारी पढ़ने के बाद ।


ध्रुवी -  यह बिल्कुल किसी मेमोरी की तरह है । इसकी तकनीक आज के मेमोरी 

कार्ड जैसी ही है ।  


सम्युग - मनुष्य आज तकनिकी रुप से इतना सक्षम है कि इस तरह की किसी 

मशीन मे जो सुचना उपलब्ध है उसे पढ़ा जा सके ।


ध्रुवी -  परंतु समस्या यह है कि यह मशीन 8 bit सिस्टम पर आधारित है । पर आज हमने करीब 800 bit सिस्टम पर आधारित कंप्यूटर बना लिये है । इस तरह के 8 bit कंप्यूटर करीब सन्‌ 1990 के दशक मे उपयोग किये जाते थे ।

सम्युग – इस तरह का पुराना कम्प्युटर हमे कहा मिलेगा ?

ध्रुवी – मिल सकता है , जापान ने 2030 मे टॉकियो मे एक कम्प्युटर म्युजियम बनाया था । हम कल ही हम इस मशीन को लेकर टॉकियो चले जायेंगे ।


नई दिल्ली से टॉकियो के लिये प्लेन मे दोनो बैठ जाते है ।


दिनांक 25 जनवरी 2051 ,  टॉकियो , जापान ।


वे दोनो अगले दिन सुबह अपने गाइड के साथ उस म्युजियम मे जाते है । और 

वहा के मेनेजर जियांग से मिलते है ।


ध्रुवी – सर मेरा नाम ध्रुवी पुरातत्व विभाग भारत सरकार , और ये है सम्युग पुरातत्व विभाग श्री लंका से । दरअसल हमे 1990 के दशक के 8 bit कंप्यूटर की आवश्यकता है । हमे रिसर्च करते समय एक 8 bit सिस्टम पर आधारित एक डेटा स्टोरेज मशीन मिली है और हमें उसका डेटा प्राप्त करना है । तो अगर आप हमे वह कंप्यूटर उपयोग करने देंगे तो आपकी बडी़ मेहरबानी होगी ।


गाइड मेनेजर जियांग को सबकुछ समझाता है ।


जियांग -  हमारे लिये बड़े सौभाग्य की बात होगी की हमारा यह संग्राहालय 

आपके काम आ सके । आप इसका उपयोग कर सकते है ।



जियांग उन्हे उस कंप्यूटर के पास ले जाकर छोड़ देते है ।


जियांग – अब आप अपना काम कर सकते है । Best of Luck

ध्रुवी – Thank you sir .

ध्रुवी और सम्युग उस मशीन को कंप्यूटर से कनेक्ट करते है । उस समय के कंप्यूटर मे wireless डेटा ट्रांस्फर करने के लिये केवल Bluetooth ही एक मात्र माध्यम था । ये कम्प्युटर केबल से बाहरी डिवाइस को कनेक्ट करने मे सक्षम नहीं थे । अतः वे Bluetooth के माध्यम से डेटा ट्रांस्फर  स्टार्ट कर देते है ।



आगे क्या होने वाला है ये जानेंगे अगले एपिसोड मे ।


अगर आप यह कहानी वीडियो  में जानना चाहते है तो comment करे | 

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